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Gopalganj: 51,000 दीपों से जगमग हुआ शक्तिपीठ सिंहासनी मंदिर, दूर-दूर से दीप दान करने आये लोग


धनंजय कुमार

गोपालगंज. मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था. इस खुशी में देवताओं ने दिवाली मनाई थी. इसके बाद से ही पृथ्वी पर देव दीपावाली मनाने की परंपरा चली आ रही है. बिहार के गोपालगंज में भी देव दीपावली मनाई गई. यहां के थावे की प्रसिद्ध शक्तिपीठ सिंहासनी मंदिर में देव दीपावली के अवसर पर 51,000 दीप जलाये गये. इतनी बड़ी संख्या में जलाये गए दीपों की रोशनी से मंदिर जगमगा उठा. इस मौके पर यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दीप दान करने आए आये हुए थे. बिहार समेत उत्तर प्रदेश और पड़ोसी देश नेपाल से आये हजारों भक्तों ने दीपदान और पूजा-अर्चना की.

दीपदान से मां सिंहासनी का आशीर्वाद मिलने की आस्था

मान्यता है कि दीपदान और पूजा-अर्चना करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और मां सिंहासनी का आशीर्वाद प्राप्त होता है. हर साल देव दीपावाली के दिन थावे मंदिर परिसर को आकर्षक रंग-बिरंगी रोशनी से जगमग किया जाता है. इस साल भी आकर्षक लाइट से मां का दरबार सजाया गया है. साथ ही दीयों से आकर्षक रंगोली भी बनाई गई, जो सबके आकर्षण का केंद्र रहा.

11 वर्ष से मनाई जा रही दीप दीपावाली

गोपालगंज के थावे मंदिर में लगभग 11 वर्षों से दीप दीपावाली मनाई जा रही है. यहां के अलावा बेलवानवा के हनुमान मंदिर और बंगरा के शिव मंदिर में भी देव दिवाली मनाई गई. श्रद्धालु खुशबू कुमारी ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रिपुरासुर राक्षस के अत्याचार और अधर्म से तीनों लोक में हाहाकार मचा हुआ था. तब सभी देवी-देवताओं ने इससे मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की. इसके बाद भगवान शंकर ने कार्तिक पूर्णिमा पर त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया. इससे प्रसन्न होकर सभी देवी-देवताओं ने उत्सव मनाया और दीपदान किया. तब से हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर देव दिवाली मनाई जाती है.

Tags: Bihar News in hindi, Deepawali 2022, Gopalganj news



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