HomeBiharबेटे हैं मांसाहारी! इसलिए जीते जी 2 साल से खुद का श्राद्ध...

बेटे हैं मांसाहारी! इसलिए जीते जी 2 साल से खुद का श्राद्ध कर रहे कबीरपंथी पिता, जानें डिटेल


अभिषेक रंजन/मुजफ्फरपुर. बिहार के ग्रामीण क्षेत्र की एक पुरानी कहावत है-आपरूपी भोजन, पररूपी श्रृंगार. अर्थात भोजन वह करें, जो आपको अच्छा लगे और श्रृंगार वह करें, जो दूसरों को अच्छा लगे. लेकिन मुजफ्फरपुर के एक पिता ने अपने दो बेटों से उनके मरनोपरांत आयोजित किए जाने वाले श्राद्धकर्म का अधिकार इसलिए छीन लिया, क्योंकि दोनों बेटे मांसाहारी हैं और पिता खुद शाकाहारी कबीरपंथी.

मुजफ्फरपुर जिले के सकरा प्रखंड के भरथीपुर गांव निवासी 73 वर्षीय हरिचंद्र दास की. वे पिछले दो साल से अपना श्राद्ध और वाषिर्क श्राद्ध कर्म करते आ रहे हैं. पूजा-पाठ, मंत्रोच्चार और हवन के बाद कबीरपंथ के अनुयायी साधुओं के लिए खरी-पूरी का भंडा करते हैं. इस बार भी 4 नवंबर को जब उन्होंने वार्षिक श्राद्धकर्म और साधुओं के लिए खीर-पूरी का भंडारा किया तो एक बार फिर से चर्चा में आ गए. न्यूज 18 लोकल के संवाददाता से उन्होंने अपने जीते-जी अपना श्राधकर्म करने के बारे में पूरी जानकारी दी.

‘बेटे मांसाहारी (साकट) और मैं ठहरा वैष्णव’
हरिचंद्र दास कहते हैं कि उनके दो बेटे हैं. दोनों मांसाहारी हैं. मैं कबीरपंथी हूं. वैष्णव हूं. वे लोग (साकट) मुंह में आग देते (मुखग्नी) हैं और हमलोगों का कबीरपंथी तरीका से दाह-संस्कार होता है. इसलिए भी काफी दिनों में मन में ऐसी भवनाएं थीं. हमारे पंथ से जुड़े लोग अक्सर ऐसा करते भी हैं, तो कई लोगों के पास इस बात की चर्चा की. ऐसा सुनने के बाद खुद हमारे रिश्तेदारों ने भी नाराजगी जताई थी. फिर सबको मनाने का प्रयास किया और पिछले साल विधिवत अपना श्राद्ध कर्म किया. भोज भी दिया गया था. अभी 4 नवंबर को ही पहला वार्षिक श्राद्धकर्म किया हूं. कबीरपंथी साधुओं के लिए भंडारा भी किया गया था. इसमें बेटी भी आई हुई थी.

अपने परिवार से अब कोई लेना-देना नहीं
हरीचंद्र दास बताते हैं कि वह कबीरपंथी समुदाय के हैं, उनके समुदाय में बहुत सारे लोग जीते-जी अपना श्राद्ध कर लेते हैं. आगे हरिचंद्र दास बताते हैं, वह एक संत व्यक्ति हैं, अब अपने परिवार से उन्हें अब कोई लेना देना नहीं है. छह महीने के बाद आश्रम चला जाऊंगा. हरिचंद्र ने अपनी पत्नी को भी कबीरपंथी बना दिया है. हरिचंद्र के परिवार वाले भी इस श्राद्ध कर्म से खुश हैं, वे कहते हैं अपने जीवन में ही श्राद्ध करने में कोई बुराई नहीं है.

Tags: Bihar News, Muzaffarpur news



Source link

Advertisement
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

POPULAR POST

- Advertisment -