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बेगूसराय के उत्क्रमित मध्य विद्यालय किल्ली पहाड़पुर में ग्रामीणों ने जड़ा ताला, जानिए वजह


रिपोर्ट : नीरज कुमार

बेगूसराय. बेगूसराय जिले में पिछले 16 दिनों से एक सरकारी स्कूल के मेन गेट समेत सारी कक्षाओं पर पर ग्रामीणों ने ताला जड़ दिया है. ग्रामीणों ने यह कार्रवाई प्रधानाचार्य पर गबन का आरोप लगाते हुए की है. नतीजतन, बच्चों की पढ़ाई बंद है. यह मामला उत्क्रमित मध्य विद्यालय किल्ली पहाड़पुर का है.

ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की जांच जिला प्रशासन के द्वारा नहीं कराया जाता है, तब तक स्कूल का ताला नहीं खुलेगा. लेकिन 16 दिन बीत जाने के बाद भी न तो जांच शुरू हुई है और न ही स्कूल का ताला खुल पाया है. आपको बता दें इस विद्यालय के शिक्षक अपनी ड्यूटी बीआरसी में दे रहे हैं. ऐसे में कहना ये गलत नहीं होगा कि ग्रामीण इलाकों में स्कूली शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है.

उत्क्रमित मध्य विद्यालय किल्ली पहाड़पुर

पूरा मामला जिला मुख्यालय से तकरीबन 10 किलोमीटर दूर बेगूसराय सदर प्रखंड के किल्ली पहाड़पुर गांव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय पहाड़पुर से जुड़ा है. पिछले 16 दिनों से इस स्कूल में ताला लटका हुआ है. पढ़ाई-लिखाई बंद है और छात्र स्कूल नहीं आ रहे हैं. ग्रामीणों ने सभी कमरों में ताला जड़ दिया है. ग्रामीणों की मानें, तो किल्ली पहाड़पुर विद्यालय में प्रधानाचार्य ने सरकारी राशि का गबन किया है. इसी बात से नाराज ग्रामीणों ने विद्यालय में ताला जड़ दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने प्रधानाचार्य की लिखित शिकायत विभागीय अधिकारी से की है. लेकिन इस शिकायत की सुध लेनेवाला कोई नहीं है.

पढ़ाई का काम नहीं होनी चाहिए बंद

उत्क्रमित मध्य विद्यालय पहाड़पुर में पढ़ानेवाली शिक्षिका ज्योति रानी बताती हैं कि ग्रामीणों ने स्कूल में ताला जड़ दिया है. जिस वजह से बीआरसी में ड्यूटी करनी पड़ रही है. उत्क्रमित मध्य विद्यालय पहाड़पुर के बच्चों का भविष्य अंधकार में है. स्कूल के शिक्षक बीआरसी में बैठे हैं और बच्चे स्कूल खुलने की आस में टकटकी लगाए हैं. इस समस्या का निदान कर देना चाहिए. शिक्षिका ने कहा कि स्कूल छोड़कर बीआरसी में बैठना अच्छा नहीं लगता है. हमारी जिम्मेदारी है बच्चों को पढ़ाकर उनके भविष्य को संवारने की और यह बीआरसी में बैठकर संभव नहीं हो पाएगा. 7 नवंबर से हीं ग्रामीणों ने विद्यालय में तालाबंदी कर रखी है.

जिम्मेदारी से कन्नी काट रहे अधिकारी

बीईओ प्रमोद कुमार ने बताया कि गलती जिसकी भी हो इसकी समुचित समुचित जांच होनी चाहिए. विभाग के सबसे छोटे स्तर के पदाधिकारी होने के नाते इसमें क्या कर सकते हैं. सवाल यह उठता है कि जब जिम्मेदार अधिकारी खुद अपनी जिम्मेदारी से हट जाएं तो ऐसे में शिक्षा व्यवस्था कैसे सुदृढ़ होगी. इस समस्या की गेंद शिक्षा विभाग के पाले में है. अब शिक्षा विभाग को ही तय करना है कि वह क्या चाहता है. छात्रों के भविष्य को अंधकार में डालना या फिर उनके भविष्य निर्माण में आगे की पहल करना.

Tags: Begusarai news, Bihar News, Education Department



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