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Telling Yourself The Right Of The Railway, Took Away The Property Of The Railway – अपने को रेलवे का अधिकार बता उठा ले गए रेलवे की संपत्ति


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बैरिया। दलछपरा हाल्ट रेलवे स्टेशन से अपने को रेलवे का अधिकारी और ठेकेदार बताकर लोग लाखों रुपये मूल्य के पुराने ईंट और टीन शेड तथा अन्य समान उठा ले गए। ग्रामीणों के प्रतिरोध के बाद कुछ समाग्री हाल्ट स्टेशन पर बचा हुआ है। इसे ग्रामीणों ने बलपूर्वक ले जाने से रोक दिया। आरपीएफ को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
छपरा-बलिया रेलखंड पर रेलवे लाइन के दोहरीकरण के क्रम में नए प्लेटफार्म और नई बुकिंग खिड़की का निर्माण दलछपरा रेलवे स्टेशन पर रेलवे द्वारा कराया गया है। उसके बगल में ही पुरानी बुकिंग खिड़की, स्टेशन भवन व प्लेटफार्म पर तीन शेड लगा हुआ था। कुछ लोगों द्वारा तीन दिन पूर्व पुराने बुकिंग खिड़की व स्टेशन भवन को गिराकर 12 ट्रैक्टर ट्राली ईंट उठा ले गए। स्टेशन पर यात्रियों को बैठने के लिए लगाया गया टीन शेड भी गिराकर उसे उठा ले गए। दूसरे दिन उक्त गांव के अमरजीत गुप्त, धनलाल यादव, शैलेश वर्मा, नीलेश गुप्ता, उमेश गुप्त, सुरेश राम, लल्लन गुप्त, रामलाल सहित अन्य ग्रामीणों ने स्टेशन से ट्रैक्टर पर समान लादने से रोक दिया। पूछताछ की। उक्त व्यक्तियों ने अपने को ठेकेदार तो कभी रेलवे का अधिकारी बनकर ग्रामीणों पर दबाव बनाना चाहा। इस पर ग्रामीण उग्र हो गए। कहा कि बिना आईडी और अधिकार पत्र दिखाए, स्टेशन से कुछ नहीं ले जाने देंगे। ग्रामीणों के तेवर देखते हुए रेलवे का समान लादकर ले जाने वाले भाग निकले। ग्रामीणों ने रेलवे के अभियंताओं पर साठगांठ का आरोप लगाते हुए रेलवे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रेल अधिकारियों से इसकी जांच कराने की मांग की। इस आरपीएफ बलिया के प्रभारी उप निरीक्षक शत्रुघ्न प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि प्रकरण के विषय में मुझे कोई जानकारी नहीं है। ग्रामीणों की तरफ से अगर शिकायत प्राप्त होती है तो प्रकरण की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
हाल्ट पर प्लेटफार्म की नहीं है व्यवस्था
बैरिया। दलछपरा हाल्ट रेलवे स्टेशन पर आंदोलित ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के श्रीनगर, दलछपरा, हनुमानगंज, दुर्जनपुर, नरायनगढ़, दुर्जनपुर, मूनछपरा, लक्ष्मीपुर आदि गांव के 500 यात्री जिला मुख्यालय तक हर रोज यात्रा करते हैं। प्लेटफार्म की सुविधा न होने से खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को चढ़ने उतरने में दिक्कत हो रही है। वहीं, ट्रेनों की प्रतीक्षा में धूप और बारिश से छिपने के लिए कोई माकूल व्यवस्था नहीं है।

बैरिया। दलछपरा हाल्ट रेलवे स्टेशन से अपने को रेलवे का अधिकारी और ठेकेदार बताकर लोग लाखों रुपये मूल्य के पुराने ईंट और टीन शेड तथा अन्य समान उठा ले गए। ग्रामीणों के प्रतिरोध के बाद कुछ समाग्री हाल्ट स्टेशन पर बचा हुआ है। इसे ग्रामीणों ने बलपूर्वक ले जाने से रोक दिया। आरपीएफ को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।

छपरा-बलिया रेलखंड पर रेलवे लाइन के दोहरीकरण के क्रम में नए प्लेटफार्म और नई बुकिंग खिड़की का निर्माण दलछपरा रेलवे स्टेशन पर रेलवे द्वारा कराया गया है। उसके बगल में ही पुरानी बुकिंग खिड़की, स्टेशन भवन व प्लेटफार्म पर तीन शेड लगा हुआ था। कुछ लोगों द्वारा तीन दिन पूर्व पुराने बुकिंग खिड़की व स्टेशन भवन को गिराकर 12 ट्रैक्टर ट्राली ईंट उठा ले गए। स्टेशन पर यात्रियों को बैठने के लिए लगाया गया टीन शेड भी गिराकर उसे उठा ले गए। दूसरे दिन उक्त गांव के अमरजीत गुप्त, धनलाल यादव, शैलेश वर्मा, नीलेश गुप्ता, उमेश गुप्त, सुरेश राम, लल्लन गुप्त, रामलाल सहित अन्य ग्रामीणों ने स्टेशन से ट्रैक्टर पर समान लादने से रोक दिया। पूछताछ की। उक्त व्यक्तियों ने अपने को ठेकेदार तो कभी रेलवे का अधिकारी बनकर ग्रामीणों पर दबाव बनाना चाहा। इस पर ग्रामीण उग्र हो गए। कहा कि बिना आईडी और अधिकार पत्र दिखाए, स्टेशन से कुछ नहीं ले जाने देंगे। ग्रामीणों के तेवर देखते हुए रेलवे का समान लादकर ले जाने वाले भाग निकले। ग्रामीणों ने रेलवे के अभियंताओं पर साठगांठ का आरोप लगाते हुए रेलवे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रेल अधिकारियों से इसकी जांच कराने की मांग की। इस आरपीएफ बलिया के प्रभारी उप निरीक्षक शत्रुघ्न प्रसाद द्विवेदी ने बताया कि प्रकरण के विषय में मुझे कोई जानकारी नहीं है। ग्रामीणों की तरफ से अगर शिकायत प्राप्त होती है तो प्रकरण की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।

हाल्ट पर प्लेटफार्म की नहीं है व्यवस्था

बैरिया। दलछपरा हाल्ट रेलवे स्टेशन पर आंदोलित ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के श्रीनगर, दलछपरा, हनुमानगंज, दुर्जनपुर, नरायनगढ़, दुर्जनपुर, मूनछपरा, लक्ष्मीपुर आदि गांव के 500 यात्री जिला मुख्यालय तक हर रोज यात्रा करते हैं। प्लेटफार्म की सुविधा न होने से खासकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को चढ़ने उतरने में दिक्कत हो रही है। वहीं, ट्रेनों की प्रतीक्षा में धूप और बारिश से छिपने के लिए कोई माकूल व्यवस्था नहीं है।



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