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Mp News: Kamal Nath’s Plan To ‘chit’ Shivraj, ‘gift’ Given To 3.5 Lakh Workers Before Coming To Power – Mp News: कमलनाथ का शिवराज को ‘चित’ करने का प्लान, सत्ता में आने से पहले साढ़े तीन लाख कर्मियों को दिया ‘तोहफा’


मंत्रालय भवन, वल्लभ भवन, भोपाल

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– फोटो : File

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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी एक साल का समय बाकी है। इसके पहले ही राजनीति पार्टियों ने वोटरों को साधने दाव चलने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सत्ता में आने पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने का ऐलान किया है। प्रदेश में 1 जनवरी 2005 के बाद नौकरी में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इन्हें अंशदाई पेंशन योजना के तहत पेंशन मिलेगी। इसके चलते कर्मचारी लंबे समय से पुरानी योजना योजना लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कर्मचारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में गांधी प्रतिमा के सामने धरना देने का ऐलान भी किया है।
 
इसलिए बीजेपी के सामने चुनौती
प्रदेश में साढ़े तीन लाख कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं, आने वाले समय में प्रदेश में सरकारी नौकरी में आने वाले कर्मचारियों को भी लाभ नहीं मिलेगा। इनके लिए नई पेंशन योजना लागू है। जिसमें सेवानिवृत्त के बाद कर्मचारियों को बहुत कम पेंशन मिलती है। यही कारण है कि कर्मचारी अपने बुढ़ापे को लेकर चिंतित हैं। इसलिए कांग्रेस के दाव ने बीजेपी के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।
 
साढ़े तीन लाख है कर्मचारी
प्रदेश में 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे प्रदेश में साढ़े तीन लाख कर्मचारी हैं। एक कर्मचारी के घर में तीन वोट भी मान कर चले तो करीब 10 लाख से ज्यादा वोट होते है। यह संख्या चुनाव का गणित बनाने और बिगाड़ने के लिए काफी है।
 
पिछले चुनाव के दावे का मिला था लाभ
वहीं, कांग्रेस ने 2018 के चुनाव में किसानों के कर्ज माफी का मुद्दा बनाया था। जिसका उसे चुनाव में फायदा होता भी दिखा था। राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने पेंशन योजना को पहले ही लागू कर दिया है।  
 
क्या है पुरानी पेंशन और नई पेंशन योजना
– पुरानी पेंशन योजना- पुरानी पेंशन योजना में पूरी पेंशन राशि सरकार ही देती थी। इसमें पगार से राशि नहीं काटी जाती थी। कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद हर महीने मिलने वाली पेंशन उसके वेतन से आधी राशि होती थी।
– अंशदाई पेंशन योजना- नई पेंशन योजना या अंशदाई पेंशन योजना में कर्मचारी अपने मासिक वेतन का 10 प्रतिशत भुगतान करते हैं। सरकार भी इतनी ही राशि मिलाती है। हालांकि मई 2021 के बाद सरकार ने अपना हिस्सा 4 प्रतिशत बढ़ा दिया है। अब कर्मचारी के वेतन का 24 प्रतिशत पेंशन के नाम पर लिया जाता है। इस राशि को इक्विटी शेयरों में निवेश किया जाता है। निवेश की गई राशि के रिटर्न पर नई पेंशन निर्भर करती है। निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं है।
 
सरकार कर्मचारियों के हित में निर्णय लें
मध्य प्रदेश भोपाल तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी का कहना है कि नई पेंशन कर्मचारियों के साथ अत्याचार है। सांसद विधायक गण को एक बार जीतने पर भी पेंशन दी जाती है। वहीं कर्मचारियों को शासन की सेवा करने के बाद एनपीएस के जरिए जो पैसा मिलेगा उसमें बुढ़ापे में जीवन यापन करना कठिन होगा। सरकार को राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरह मध्य प्रदेश में पुरानी पेंशन अविलंब लागू करना चाहिए।
 

विस्तार

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी एक साल का समय बाकी है। इसके पहले ही राजनीति पार्टियों ने वोटरों को साधने दाव चलने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सत्ता में आने पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने का ऐलान किया है। प्रदेश में 1 जनवरी 2005 के बाद नौकरी में आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इन्हें अंशदाई पेंशन योजना के तहत पेंशन मिलेगी। इसके चलते कर्मचारी लंबे समय से पुरानी योजना योजना लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कर्मचारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में गांधी प्रतिमा के सामने धरना देने का ऐलान भी किया है।

 

इसलिए बीजेपी के सामने चुनौती

प्रदेश में साढ़े तीन लाख कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं, आने वाले समय में प्रदेश में सरकारी नौकरी में आने वाले कर्मचारियों को भी लाभ नहीं मिलेगा। इनके लिए नई पेंशन योजना लागू है। जिसमें सेवानिवृत्त के बाद कर्मचारियों को बहुत कम पेंशन मिलती है। यही कारण है कि कर्मचारी अपने बुढ़ापे को लेकर चिंतित हैं। इसलिए कांग्रेस के दाव ने बीजेपी के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।

 

साढ़े तीन लाख है कर्मचारी

प्रदेश में 1 जनवरी 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे प्रदेश में साढ़े तीन लाख कर्मचारी हैं। एक कर्मचारी के घर में तीन वोट भी मान कर चले तो करीब 10 लाख से ज्यादा वोट होते है। यह संख्या चुनाव का गणित बनाने और बिगाड़ने के लिए काफी है।

 

पिछले चुनाव के दावे का मिला था लाभ

वहीं, कांग्रेस ने 2018 के चुनाव में किसानों के कर्ज माफी का मुद्दा बनाया था। जिसका उसे चुनाव में फायदा होता भी दिखा था। राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने पेंशन योजना को पहले ही लागू कर दिया है।  

 

क्या है पुरानी पेंशन और नई पेंशन योजना

– पुरानी पेंशन योजना- पुरानी पेंशन योजना में पूरी पेंशन राशि सरकार ही देती थी। इसमें पगार से राशि नहीं काटी जाती थी। कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद हर महीने मिलने वाली पेंशन उसके वेतन से आधी राशि होती थी।

– अंशदाई पेंशन योजना- नई पेंशन योजना या अंशदाई पेंशन योजना में कर्मचारी अपने मासिक वेतन का 10 प्रतिशत भुगतान करते हैं। सरकार भी इतनी ही राशि मिलाती है। हालांकि मई 2021 के बाद सरकार ने अपना हिस्सा 4 प्रतिशत बढ़ा दिया है। अब कर्मचारी के वेतन का 24 प्रतिशत पेंशन के नाम पर लिया जाता है। इस राशि को इक्विटी शेयरों में निवेश किया जाता है। निवेश की गई राशि के रिटर्न पर नई पेंशन निर्भर करती है। निश्चित पेंशन की गारंटी नहीं है।

 

सरकार कर्मचारियों के हित में निर्णय लें

मध्य प्रदेश भोपाल तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव उमाशंकर तिवारी का कहना है कि नई पेंशन कर्मचारियों के साथ अत्याचार है। सांसद विधायक गण को एक बार जीतने पर भी पेंशन दी जाती है। वहीं कर्मचारियों को शासन की सेवा करने के बाद एनपीएस के जरिए जो पैसा मिलेगा उसमें बुढ़ापे में जीवन यापन करना कठिन होगा। सरकार को राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरह मध्य प्रदेश में पुरानी पेंशन अविलंब लागू करना चाहिए।

 



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