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Good News: बेतिया के ‘मछली लोक’ में मुफ्त प्रशिक्षण लेकर बनिए आत्मनिर्भर, होगी बंपर कमाई


आशीष कुमार

बेतिया. आज के युग में रोजगार के लिए जूझना पड़ता है. ऐसे में अगर आप सफल और लाभ से भरा व्यवसाय करना चाहते हैं, तो मत्स्य पालन एक बेहतर विकल्प है. जानकारों के मुताबिक यह ऐसा व्यवसाय है जिसमें लागत काफी कम और लाभ अधिक है. इसके आलावा वैसे किसान जिनकी जमीन बंजर हो चुकी है या फिर ऐसी जमीन जिसपर खेती नहीं की जा सकती, उनके लिए मत्स्य पालन रोजगार का श्रेष्ठ माध्यम है. बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया में राज्य का पहला मत्स्य पालन केंद्र मौजूद है. आज की तारीख में यह अच्छी तरह से फल-फूल रहा है. यहां मछली पालन का काम बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.

इस मछली पालन केंद्र की स्थापना वर्ष 1986 में हुई थी. यह पूरी तरह से गैर-सरकारी है. इतना ही नहीं, इसके कई एकड़ में फैले होने और पूरी तरह से प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे होने के कारण यह एक खूबसूरत पर्यटन क्षेत्र में भी तब्दील हो चुका है. यहां हर दिन सैकड़ों लोग प्रकृति का आनंद लेने के लिए आते हैं. इस केंद्र में मछलियों के लिए कुल 30 से 35 तालाब और पोखर मौजूद हैं. साथ ही उनके व्यापार के लिए अलग से स्टॉकिंग पॉइंट्स भी बने हुए हैं जहां से उन्हें निकालकर बेचा जाता है. मछलियों के व्यापार के साथ-साथ यहां मुफ्त में मछली पालन और उनके उत्पत्ति से संबंधित प्रशिक्षण भी दी जाती है.

कम लागत में अधिक कमाई के लिए मत्स्य पालन बेहतर व्यवसाय

इस मत्स्य पालन केंद्र के मालिक राघव कुमार ने बताया कि अगर आप कम लागत में सफल व्यवसाय करना चाहते हैं तो मछली पालन सबसे बेहतर व्यवसाय है. अगर किसी व्यक्ति के पास ऐसी जमीन है, जो बिलकुल यूजलेस है तो उसपर बड़ी ही आसानी से मछली पालन का व्यवसाय कर अच्छी आमदनी की जा सकती है. रेड कार्प, कॉमन कार्प, रोहू इत्यादि कुछ ऐसी मछलियां हैं जिनको पालकर आसानी से बड़ा किया जा सकता है और व्यापार कर अच्छी कमाई की जा सकती है.

‘मछली लोक’ के नाम से प्रसिद्ध यह क्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में मशहूर

बेतिया शहर में स्थित यह मछली पालन केंद्र ‘मछली लोक’ के नाम से जाना जाता है. इसकी प्राकृतिक सुंदरता लोगों को यहां बरबस खींच लाती है. ऐसा नहीं है कि यहां लोग सिर्फ परिवार के साथ ही घूमने आते हैं, बल्कि स्कूलों और कॉलेजों की तरफ से भी प्रशिक्षण के लिए छात्रों को यहां लाया जाता है. इसके अलावा, पिकनिक के लिए भी स्कूली छात्रों के द्वारा इस जगह को प्राथमिकता दी जाती है.

Tags: Bihar News in hindi, Champaran news, Fisheries, Trout Fish Farming



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