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Gonda,investigate,docter,pataient Death – चार डॉक्टरों की टीम ने भी की जांच, फिर भी खाली हाथ



फोटो-10 गोंडा के महिला अस्पताल में इमरजेंसी। -संवाद
– फोटो : GONDA

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गोंडा। महिला अस्पताल में ऑपरेेशन के बाद हुई प्रसूता की मौत के मामले में जांच बाद भी कुछ हाथ नहीं लगा है। चार डॉक्टरों की टीम भी अपनी जांच पड़ताल में प्रसूता की मौत का कोई स्पष्ट कारण नहीं खोज पाई। जांच टीम ने प्रसूता के पल्मोनरी एंबोलिज्म से पीड़ित होने की संभावना जताते हुए अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी। मृतका का पोस्टमार्टम न हो पाने के कारण जांच टीम मौत के कारण को लेकर पूरी तरह ऊहापोह में है। दूसरी तरफ इस मामले में डॉक्टर व स्टाफ नर्स की तहरीर पर पुलिस अब मामले की जांच कर आरोपियों पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में जुटी दिख रही है। इससे पीड़ित परिवार दबाव में है।
बीती 14 सितंबर को जिला महिला अस्पताल में भर्ती प्रसूता प्रियंका श्रीवास्तव की मौत का मामला विधानसभा में गूंजा था। इसके बाद बुधवार को जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार ने सीएमओ से पूरे मामले की गहन जांच कराकर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। इस मामले में सीएमओ ने चार डॉक्टरों की टीम गठित कर मृतका के मौत के कारण की जांच करवाई। सूत्रों की माने तो चारों विशेेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी काफी माथा पच्ची के बाद भी प्रसूता की मौत का कोई स्पष्ट कारण नहीं ढूंढ पाई। जांच टीम की करीब आठ घंटे चली मैराथन बैठक भी बेनतीजा रही।
टीम में शामिल स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पीडी गुप्ता ने बताया कि प्रसूता के इलाज में डॉक्टरों की ओर से कोई लापरवाही बरती गयी यह कह पाना संभव नहीं है। पोस्टमार्टम न होने के कारण प्रसूता की मौत के वास्तविक कारण का पता कर पाना काफी मुश्किल है। सीएमओ को सौंपी गयी रिपोर्ट में बताया गया है कि घटना क्रम को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मृतका कभी कभार होने वाली मेडिकल जटिलता का शिकार हुई है। लक्षणों के आधार पर संभावना जताई गयी कि मृतक प्रसूता की पल्मोनरी एंबोलिज्म नामक बीमारी हो सकती है। इस बीमारी में मरीज की नसों में खून जम जाता है। इस खून के थक्का बनकर फेफड़े में फंस जाने के कारण भी मरीज की मौत हो सकती है।
इसके साथ ही रिपोर्ट में प्रसूता को ऑपरेशन थियेटर से निकलने के तुरंत बाद कुछ दवाओं के रिएक्शन होने की संभावना भी जताई गयी है। ऐसे में प्रसूता की मौत के किसी एक कारण को स्पष्ट कर पाना संभव नही हो पा रहा है। जांच टीम में डॉ. पीडी गुप्ता के साथ ही एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुर्वणा कुमार व बेहोशी के डॉ. कुमार ज्ञानम शामिल थे। हालांकि सीएमओ ने अधिकृत तौर पर अभी जांच रिपोर्ट मिलने से इंकार किया है। उन्होंने बताया कि गठित टीम की तरफ से मिलने वाली जांच रिपोर्ट सीधे जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।
मृतका के परिजनों पर दबाव बना रही पुलिस
जिला प्रशासन के निर्देश पर प्रसूता की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए गठित चार सदस्यीय डॉक्टरों की जांच में कुछ भी सामने न आने के बाद अब पुलिस पीड़ितों पर दबाव बनाने में जुटी है। मृतका के इलाज से जुड़ी डॉ. ललिता केरकेट्टा व स्टाफ नर्स विनीता की तहरीर पर कोतवाली नगर पुलिस ने मृतका के परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज मामले की जांच शुरू कर दी है।
मृतका के भाई रितेश श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस उसे और उसके परिवार वालों को लगातार परेशान कर रही है। दिन में तीन चार बार फोन कर कोतवाली व पुलिस चौकी बुलाया जा रहा है। उसके बहन के पति रत्नेश श्रीवास्तव व परिवार के अन्य लोगों को भी परेशान किया जा रहा है।

गोंडा। महिला अस्पताल में ऑपरेेशन के बाद हुई प्रसूता की मौत के मामले में जांच बाद भी कुछ हाथ नहीं लगा है। चार डॉक्टरों की टीम भी अपनी जांच पड़ताल में प्रसूता की मौत का कोई स्पष्ट कारण नहीं खोज पाई। जांच टीम ने प्रसूता के पल्मोनरी एंबोलिज्म से पीड़ित होने की संभावना जताते हुए अपनी रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी। मृतका का पोस्टमार्टम न हो पाने के कारण जांच टीम मौत के कारण को लेकर पूरी तरह ऊहापोह में है। दूसरी तरफ इस मामले में डॉक्टर व स्टाफ नर्स की तहरीर पर पुलिस अब मामले की जांच कर आरोपियों पर मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में जुटी दिख रही है। इससे पीड़ित परिवार दबाव में है।

बीती 14 सितंबर को जिला महिला अस्पताल में भर्ती प्रसूता प्रियंका श्रीवास्तव की मौत का मामला विधानसभा में गूंजा था। इसके बाद बुधवार को जिलाधिकारी डॉ. उज्जवल कुमार ने सीएमओ से पूरे मामले की गहन जांच कराकर तत्काल रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। इस मामले में सीएमओ ने चार डॉक्टरों की टीम गठित कर मृतका के मौत के कारण की जांच करवाई। सूत्रों की माने तो चारों विशेेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी काफी माथा पच्ची के बाद भी प्रसूता की मौत का कोई स्पष्ट कारण नहीं ढूंढ पाई। जांच टीम की करीब आठ घंटे चली मैराथन बैठक भी बेनतीजा रही।

टीम में शामिल स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पीडी गुप्ता ने बताया कि प्रसूता के इलाज में डॉक्टरों की ओर से कोई लापरवाही बरती गयी यह कह पाना संभव नहीं है। पोस्टमार्टम न होने के कारण प्रसूता की मौत के वास्तविक कारण का पता कर पाना काफी मुश्किल है। सीएमओ को सौंपी गयी रिपोर्ट में बताया गया है कि घटना क्रम को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मृतका कभी कभार होने वाली मेडिकल जटिलता का शिकार हुई है। लक्षणों के आधार पर संभावना जताई गयी कि मृतक प्रसूता की पल्मोनरी एंबोलिज्म नामक बीमारी हो सकती है। इस बीमारी में मरीज की नसों में खून जम जाता है। इस खून के थक्का बनकर फेफड़े में फंस जाने के कारण भी मरीज की मौत हो सकती है।

इसके साथ ही रिपोर्ट में प्रसूता को ऑपरेशन थियेटर से निकलने के तुरंत बाद कुछ दवाओं के रिएक्शन होने की संभावना भी जताई गयी है। ऐसे में प्रसूता की मौत के किसी एक कारण को स्पष्ट कर पाना संभव नही हो पा रहा है। जांच टीम में डॉ. पीडी गुप्ता के साथ ही एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुर्वणा कुमार व बेहोशी के डॉ. कुमार ज्ञानम शामिल थे। हालांकि सीएमओ ने अधिकृत तौर पर अभी जांच रिपोर्ट मिलने से इंकार किया है। उन्होंने बताया कि गठित टीम की तरफ से मिलने वाली जांच रिपोर्ट सीधे जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।

मृतका के परिजनों पर दबाव बना रही पुलिस

जिला प्रशासन के निर्देश पर प्रसूता की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए गठित चार सदस्यीय डॉक्टरों की जांच में कुछ भी सामने न आने के बाद अब पुलिस पीड़ितों पर दबाव बनाने में जुटी है। मृतका के इलाज से जुड़ी डॉ. ललिता केरकेट्टा व स्टाफ नर्स विनीता की तहरीर पर कोतवाली नगर पुलिस ने मृतका के परिजनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज मामले की जांच शुरू कर दी है।

मृतका के भाई रितेश श्रीवास्तव ने बताया कि पुलिस उसे और उसके परिवार वालों को लगातार परेशान कर रही है। दिन में तीन चार बार फोन कर कोतवाली व पुलिस चौकी बुलाया जा रहा है। उसके बहन के पति रत्नेश श्रीवास्तव व परिवार के अन्य लोगों को भी परेशान किया जा रहा है।



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