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Gonda,flud – घट रहे जलस्तर ने दिखाई तबाही, कटान से 50 सड़कें क्षतिग्रस्त



गोंडा के नवाबगंज में बाढ़ के पानी से कटी ढेमवाघाट जाने वाली सड़क। -संवाद
– फोटो : GONDA

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नवाबगंज/करनैलगंज (गोंडा)। सरयू नदी का जलस्तर जैसे-जैसे घट रहा है, वैसे बाढ़ से हुई तबाही का मंजर दिखाई देने लगा है। गांवों में जलभराव और सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। संपर्क मार्ग बह गए हैं। चारो तरफ पानी भरे होने से आवागमन थम सा गया है। नवाबगंज ब्लॉक और करनैलगंज तहसील क्षेत्र के कई गांव कटान की जद में आ चुके हैं। इधर, प्रशासन ने नुकसान का सर्वे करने को कहा है।
सरयू नदी तबाही मचाने के बाद नदी का जलस्तर में काफी गिरावट आई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बृहस्पतिवार के अपराह्न तीन बजे नदी का जलस्तर 92.640 मी दर्ज किया गया, जोकि खतरे के निशान से नौ सेमी नीचे रहा। जलस्तर घटने के तटीय इलाकों में कटान तेज हो गई है। सरयू नदी की कटान ने ढेमवाघाट मार्ग की दो सौ मीटर की सड़क को अपनी चपेट में ले लिया है। कटान से सत्तर फीसदी सड़क नदी में समाहित हो चुकी है।
नदी के कटान को देखते हुए प्रशासन द्वारा नवाबगंज-ढेमवाघाट मार्ग पर बड़े वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया है। जिस तरह से सड़क कट रही है, उससे दो पहिया वाहनों पर कभी भी रोक लगाई जा सकती है। बची हुई सड़क को बचाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा पूरा प्रयास किया जा रहा है। बाढ़ खंड के कर्मचारी बोरी में ईंट व मिट्टी भर कर कटान को रोकने के प्रयास में लगे हैं। यदि नदी का कटान जारी रहा तो एक से दो दिन में नदी सड़क को काट कर पार कर जाएगी।
बाढ़ व कटान से माझा के लोग परेशान
नदी का जलस्तर घटने के बावजूद सरयू का तांडव जारी है। बाढ़ और कटान के चपेट में आए माझा क्षेत्र में हाहाकार मचा है। बाढ़ की चपेट में आए किसानों के हजारों हेक्टेयर फसलें एकदम से चौपट हो गई है। गांव पानी से घिरे होने तथा कटान के चलते लोग परेशान हैं। कटान से कई गांवों का संपर्क मार्ग कट गया है। नदी के जलस्तर में कमी आने से तटीय इलाकों में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है।
संक्रामक बीमार का बढ़ा खतरा
गांव में जगह-जगह पानी के भरे होने तथा कीचड़ से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। जिससे डेंगू, मलेरिया जैसे तमाम संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। ढेमवा घाट,दत्तनगर, गोकुला, तुलसीपुर माझा, साखीपुर,माझा राठ, जैतपुर, दुर्गा गंज माझा, महेशपुर, कटराभोगचंद, दुल्लापुर, इस्माइलपुर लोलपुर सहित किसानों के हजारों हेक्टेयर फसलें जलमग्न हो गईं हैं। घटतेे हुए जलस्तर से मवेशियों के चारे का अभी संकट बरकरार है। वहीं एडीएम सुरेश कुमार सोनी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। प्रभावितों को राहत सामग्री का वितरण किया।
जलस्तर घटने के साथ बढ़ीं दुश्वारियां
करनैलगंज के सरयू नदी में अचानक बढ़े जलस्तर नदी का जलस्तर बीते तीन दिन पहले खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर बांध के लिए खतरा बन गया था, जो अब धीरे-धीरे जलस्तर घटते हुए खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया है। मगर दुश्वारियां बढ़ी हुईं है। बरसात के दिनों में बांध पर आए रेन कट बड़े-बड़े गड्ढों का रूप ले चुके हैं। जिससे दोबारा पानी बढ़ने पर बांध के लिए जबरदस्त खतरा बने हुए हैं। जगह- जगह कट हो जाने से बांध अब कमजोर हो चुका है।
बाढ़ कार्य खंड विभाग के अधिकारी बांध को मजबूत करने में जुटे हैं। माझा रायपुर नैपुरा, कमियार एवं नकहरा के मजरों में पानी अभी भी भरा हुआ है। एसडीएम हीरालाल ने बताया कि जलस्तर घटने से बांध के लिए खतरा कम हो गया है जिन गांव में पानी भर गया था वहां पानी निकलने लगा है। मगर अभी भी गांव में पानी भरा हुआ है। बाढ़ से प्रभावित गांव के ग्रामीणों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।
जलस्तर घटने से बाढ़ का खतरा कम हुआ है, प्रभावितों की राहत सामग्री वितरित की जा रही है। इसके अलावा नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। सुरेश कुमार सोनी, अपर जिलाधिकारी

नवाबगंज/करनैलगंज (गोंडा)। सरयू नदी का जलस्तर जैसे-जैसे घट रहा है, वैसे बाढ़ से हुई तबाही का मंजर दिखाई देने लगा है। गांवों में जलभराव और सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। संपर्क मार्ग बह गए हैं। चारो तरफ पानी भरे होने से आवागमन थम सा गया है। नवाबगंज ब्लॉक और करनैलगंज तहसील क्षेत्र के कई गांव कटान की जद में आ चुके हैं। इधर, प्रशासन ने नुकसान का सर्वे करने को कहा है।

सरयू नदी तबाही मचाने के बाद नदी का जलस्तर में काफी गिरावट आई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बृहस्पतिवार के अपराह्न तीन बजे नदी का जलस्तर 92.640 मी दर्ज किया गया, जोकि खतरे के निशान से नौ सेमी नीचे रहा। जलस्तर घटने के तटीय इलाकों में कटान तेज हो गई है। सरयू नदी की कटान ने ढेमवाघाट मार्ग की दो सौ मीटर की सड़क को अपनी चपेट में ले लिया है। कटान से सत्तर फीसदी सड़क नदी में समाहित हो चुकी है।

नदी के कटान को देखते हुए प्रशासन द्वारा नवाबगंज-ढेमवाघाट मार्ग पर बड़े वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया है। जिस तरह से सड़क कट रही है, उससे दो पहिया वाहनों पर कभी भी रोक लगाई जा सकती है। बची हुई सड़क को बचाने के लिए जिला प्रशासन द्वारा पूरा प्रयास किया जा रहा है। बाढ़ खंड के कर्मचारी बोरी में ईंट व मिट्टी भर कर कटान को रोकने के प्रयास में लगे हैं। यदि नदी का कटान जारी रहा तो एक से दो दिन में नदी सड़क को काट कर पार कर जाएगी।

बाढ़ व कटान से माझा के लोग परेशान

नदी का जलस्तर घटने के बावजूद सरयू का तांडव जारी है। बाढ़ और कटान के चपेट में आए माझा क्षेत्र में हाहाकार मचा है। बाढ़ की चपेट में आए किसानों के हजारों हेक्टेयर फसलें एकदम से चौपट हो गई है। गांव पानी से घिरे होने तथा कटान के चलते लोग परेशान हैं। कटान से कई गांवों का संपर्क मार्ग कट गया है। नदी के जलस्तर में कमी आने से तटीय इलाकों में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है।

संक्रामक बीमार का बढ़ा खतरा

गांव में जगह-जगह पानी के भरे होने तथा कीचड़ से मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। जिससे डेंगू, मलेरिया जैसे तमाम संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। ढेमवा घाट,दत्तनगर, गोकुला, तुलसीपुर माझा, साखीपुर,माझा राठ, जैतपुर, दुर्गा गंज माझा, महेशपुर, कटराभोगचंद, दुल्लापुर, इस्माइलपुर लोलपुर सहित किसानों के हजारों हेक्टेयर फसलें जलमग्न हो गईं हैं। घटतेे हुए जलस्तर से मवेशियों के चारे का अभी संकट बरकरार है। वहीं एडीएम सुरेश कुमार सोनी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। प्रभावितों को राहत सामग्री का वितरण किया।

जलस्तर घटने के साथ बढ़ीं दुश्वारियां

करनैलगंज के सरयू नदी में अचानक बढ़े जलस्तर नदी का जलस्तर बीते तीन दिन पहले खतरे के निशान से 80 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर बांध के लिए खतरा बन गया था, जो अब धीरे-धीरे जलस्तर घटते हुए खतरे के निशान से नीचे पहुंच गया है। मगर दुश्वारियां बढ़ी हुईं है। बरसात के दिनों में बांध पर आए रेन कट बड़े-बड़े गड्ढों का रूप ले चुके हैं। जिससे दोबारा पानी बढ़ने पर बांध के लिए जबरदस्त खतरा बने हुए हैं। जगह- जगह कट हो जाने से बांध अब कमजोर हो चुका है।

बाढ़ कार्य खंड विभाग के अधिकारी बांध को मजबूत करने में जुटे हैं। माझा रायपुर नैपुरा, कमियार एवं नकहरा के मजरों में पानी अभी भी भरा हुआ है। एसडीएम हीरालाल ने बताया कि जलस्तर घटने से बांध के लिए खतरा कम हो गया है जिन गांव में पानी भर गया था वहां पानी निकलने लगा है। मगर अभी भी गांव में पानी भरा हुआ है। बाढ़ से प्रभावित गांव के ग्रामीणों को सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

जलस्तर घटने से बाढ़ का खतरा कम हुआ है, प्रभावितों की राहत सामग्री वितरित की जा रही है। इसके अलावा नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। सुरेश कुमार सोनी, अपर जिलाधिकारी



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