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Bahraich – वर्कशॉप में धूल फांक रहीं 24 बसें, यात्री हलकान


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बहराइच। यात्रा के लिए रोडवेज के बस अड्डे पहुंचने वाले यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए घंटों बसों का इंतजार करने की परेशानी उठानी पड़ रही है। वही दूसरी तरफ परिवहन निगम के जिम्मेदारों की लापरवाही से बेड़े में शामिल 24 बसे मामूली खराबी दुरुस्त कराने को महीनों से वर्कशाप में खड़ी धूल फांक रही हैं। इससे निगम प्रशासन को जहां लाखों के राजस्व की चपत लग रही है वही यात्री भी बसों की कमी से हलकान है। उन्हें मजबूर होकर निजी आपरेटरों द्वारा संचालित डग्गामार बसों से महंगी और परेशानी भरी यात्रा करने को विवश होना पड़ रहा है।
जनपद मुख्यालय स्थित परिवहन निगम के रोडवेज बस अड्डे के बेड़े में मौजूदा समय 112 बसें है। इन बसों का संचालन लंबी दूरी के तहत वाराणसी, इलाहाबाद, दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, सीतापुर व हरिद्वार आदि रूट पर होता है। यात्रियों को बेहतर सुविधा के दावे के बाद भी मुख्यालय स्थित रोडवेज बस अड्डे पर यात्रियों को बसों के इंतजार में घंटों परेशान होना पड़ रहा है। दावे के बावजूद बस अड्डे से 112 बसों की जगह बमुश्किल 70 से 80 बसों का संचालन ही हो पाता है। करीब दो दर्जन से अधिक बसें तकनीकी खामियों के कारण मरम्मत के इंतजार में महीनों से वर्कशाप में खड़ी धूल फांक रही हैं।
निगम प्रशासन के जिम्मेदारों की यह उदासीनता यात्रियों पर भारी पड़ रही है। मौसम खराब होने अथवा त्योहार के सीजन में यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए बसों की भारी कमी से जूझना पड़ता है। जिले से करीब बीस हजार यात्री प्रतिदिन रोडवेज की बसों से यात्रा करते हैं। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी लंबी दूरी के बसों की कम संख्या के कारण यात्रियों को उठाना पड़ती है। इसके चलते ही मजबूरी में गंतव्य तक पहुंचने के लिए यात्रियों को निजी तौर पर संचालित डग्गामार बसों से महंगी और परेशानी भरी यात्रा को मजबूर होना पड़ता है। यात्रियों की शिकायत के बाद भी निगम के जिम्मेदार इस परेशानी से छुटकारा दिलाने को लेकर उदासीन बने हैं।
रोडवेज बसों की मरम्मत के लिए जिले में वर्कशाप तो बना दिया गया है लेकिन इसमें बसों की मरम्मत व इनकी फाल्ट दुरुस्त कराने को लेकर हमेशा ही संसाधनों की कमी बनी रहती है। जरूरी कल पुर्जों की कमी के कारण ही रूट पर दौड़ने वाली दो दर्जन से अधिक बसों की मरम्मत का कार्य तीन से चार माह बाद भी पूरा नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा खामियाजा यात्रियों को बसों की कमी के बतौर उठाना पड़ता है।
जो बसें वर्कशाप में खड़ी है उनमें कई में गंभीर तकनीकी खराबी है। समय पर बसों की मरम्मत का कार्य पूरा न हो पाने के साथ ही चालक व परिचालकों की कमी से भी रूटों पर इनका संचालन बाधित होता है। खराब पड़ी बसों को जल्द ही ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है।
बीके चौधरी, सेवा प्रबंधक

बहराइच। यात्रा के लिए रोडवेज के बस अड्डे पहुंचने वाले यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए घंटों बसों का इंतजार करने की परेशानी उठानी पड़ रही है। वही दूसरी तरफ परिवहन निगम के जिम्मेदारों की लापरवाही से बेड़े में शामिल 24 बसे मामूली खराबी दुरुस्त कराने को महीनों से वर्कशाप में खड़ी धूल फांक रही हैं। इससे निगम प्रशासन को जहां लाखों के राजस्व की चपत लग रही है वही यात्री भी बसों की कमी से हलकान है। उन्हें मजबूर होकर निजी आपरेटरों द्वारा संचालित डग्गामार बसों से महंगी और परेशानी भरी यात्रा करने को विवश होना पड़ रहा है।

जनपद मुख्यालय स्थित परिवहन निगम के रोडवेज बस अड्डे के बेड़े में मौजूदा समय 112 बसें है। इन बसों का संचालन लंबी दूरी के तहत वाराणसी, इलाहाबाद, दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, सीतापुर व हरिद्वार आदि रूट पर होता है। यात्रियों को बेहतर सुविधा के दावे के बाद भी मुख्यालय स्थित रोडवेज बस अड्डे पर यात्रियों को बसों के इंतजार में घंटों परेशान होना पड़ रहा है। दावे के बावजूद बस अड्डे से 112 बसों की जगह बमुश्किल 70 से 80 बसों का संचालन ही हो पाता है। करीब दो दर्जन से अधिक बसें तकनीकी खामियों के कारण मरम्मत के इंतजार में महीनों से वर्कशाप में खड़ी धूल फांक रही हैं।

निगम प्रशासन के जिम्मेदारों की यह उदासीनता यात्रियों पर भारी पड़ रही है। मौसम खराब होने अथवा त्योहार के सीजन में यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए बसों की भारी कमी से जूझना पड़ता है। जिले से करीब बीस हजार यात्री प्रतिदिन रोडवेज की बसों से यात्रा करते हैं। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी लंबी दूरी के बसों की कम संख्या के कारण यात्रियों को उठाना पड़ती है। इसके चलते ही मजबूरी में गंतव्य तक पहुंचने के लिए यात्रियों को निजी तौर पर संचालित डग्गामार बसों से महंगी और परेशानी भरी यात्रा को मजबूर होना पड़ता है। यात्रियों की शिकायत के बाद भी निगम के जिम्मेदार इस परेशानी से छुटकारा दिलाने को लेकर उदासीन बने हैं।

रोडवेज बसों की मरम्मत के लिए जिले में वर्कशाप तो बना दिया गया है लेकिन इसमें बसों की मरम्मत व इनकी फाल्ट दुरुस्त कराने को लेकर हमेशा ही संसाधनों की कमी बनी रहती है। जरूरी कल पुर्जों की कमी के कारण ही रूट पर दौड़ने वाली दो दर्जन से अधिक बसों की मरम्मत का कार्य तीन से चार माह बाद भी पूरा नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा खामियाजा यात्रियों को बसों की कमी के बतौर उठाना पड़ता है।

जो बसें वर्कशाप में खड़ी है उनमें कई में गंभीर तकनीकी खराबी है। समय पर बसों की मरम्मत का कार्य पूरा न हो पाने के साथ ही चालक व परिचालकों की कमी से भी रूटों पर इनका संचालन बाधित होता है। खराब पड़ी बसों को जल्द ही ठीक कराने का प्रयास किया जा रहा है।

बीके चौधरी, सेवा प्रबंधक



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